Bundi succession struggle:बूँदी उत्तराधिकार संघर्ष
Bundi succession struggle:राजस्थान के इतिहास में 18वीं शताब्दी का समय राजनीतिक अस्थिरता और आपसी संघर्षों से भरा हुआ था। इनमें से एक महत्वपूर्ण घटना थी बूँदी उत्तराधिकार संघर्ष, जिसने न केवल बूँदी राज्य की राजनीति को प्रभावित किया, बल्कि मराठों के राजस्थान में प्रवेश का भी मार्ग प्रशस्त किया।
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बूँदी राज्य और महाराव बुद्धसिंह
- Bundi succession struggle:बूँदी के राजा बुद्धसिंह, जयपुर के सवाई जयसिंह के बहनोई थे।
- बुद्धसिंह की कच्छवाहा रानी से संबंध तनावपूर्ण हो गए।
- उन्होंने अपनी चूड़ावती रानी के प्रभाव में आकर कच्छवाहा रानी के पुत्र भवानीसिंह को अपना पुत्र मानने से इनकार कर दिया।
- बुद्धसिंह ने यहाँ तक कह दिया कि यह संतान अवैध है।
दलेलसिंह का गद्दी पर बैठना
- जयसिंह ने बुद्धसिंह को सिंहासन से हटाकर करवड़ के जागीरदार हाड़ा सालिमसिंह के पुत्र दलेलसिंह को 19 मई, 1730 ई. को बूँदी का शासक बना दिया।
- मुगल बादशाह से भी इसकी स्वीकृति प्राप्त कर ली गई।
- 1732 ई. में जयसिंह ने अपनी पुत्री कृष्ण कुमारी का विवाह दलेलसिंह से कर दिया।
मराठों का बूँदी पर आक्रमण (1734 ई.)
- Bundi succession struggle:बुद्धसिंह की मृत्यु (1730 ई.) के बाद भी कच्छवाहा रानी ने अपने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश की।
- उसने सालिमसिंह के बड़े पुत्र प्रतापसिंह को मराठों से सहायता लाने दक्षिण भेजा।
- प्रतापसिंह ने होल्कर और सिन्धिया को 6 लाख रुपये देने का आश्वासन दिया।
- परिणामस्वरूप 18 अप्रैल, 1734 ई. को मल्हारराव होल्कर और राणोजी सिन्धिया की सेना ने बूँदी पर आक्रमण कर अधिकार कर लिया।
- Bundi succession struggle:इसके बाद महाराव उम्मेदसिंह को बूँदी का शासक बना दिया गया।
कच्छवाहा रानी और होल्कर का संबंध
Bundi succession struggle:कृतज्ञता प्रकट करने के लिए कच्छवाहा रानी ने होल्कर को राखी बाँधकर भाई बनाया। यह एक अद्वितीय उदाहरण था जिसमें राजनीति और व्यक्तिगत संबंधों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला।
जयसिंह का पुनः हस्तक्षेप
- Bundi succession struggle:बाद में सवाई जयसिंह ने फिर से बूँदी पर अधिकार कर लिया।
- दलेलसिंह को पुनः बूँदी का शासक बना दिया गया।
- जयसिंह के जीवनकाल में मराठों ने बूँदी के मामले में हस्तक्षेप नहीं किया।
मराठों का राजस्थान की राजनीति में स्थायी प्रवेश
Bundi succession struggle:बूँदी संघर्ष के बाद, राजपूत शासक मराठों से सैनिक सहायता पाने के लिए उत्सुक हो उठे।
- मराठों का मुख्य उद्देश्य था अधिक धन की प्राप्ति।
- दो विरोधी पक्षों के संघर्ष में एक मराठा सरदार एक पक्ष का साथ देता और दूसरा किसी अन्य मराठा का समर्थन पाता।
- कई बार तो एक ही मराठा सरदार पहले एक पक्ष और फिर विरोधी पक्ष का साथ भी दे देता था।
Bundi succession struggle:इस प्रकार मराठे शुरुआत में भाड़े के सैनिक सहयोगी के रूप में आए, लेकिन धीरे-धीरे वे राजस्थान की राजनीति के सर्वेसर्वा बन गए।
Bundi succession struggle:बूँदी उत्तराधिकार संघर्ष (1730-1734 ई.) ने राजस्थान की राजनीति में गहरा प्रभाव डाला। यह संघर्ष न केवल बूँदी राज्य की आंतरिक सत्ता संघर्ष का परिणाम था, बल्कि इसने मराठों के लिए राजस्थान में हस्तक्षेप और प्रभाव जमाने के दरवाजे खोल दिए।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1. बूँदी राज्य का राजा बुद्धसिंह किसका बहनोई था?
- (A) महाराणा संग्रामसिंह
- (B) सवाई जयसिंह
- (C) दुर्गादास राठौड़
- (D) होल्कर
उत्तर: (B) सवाई जयसिंह
प्रश्न 2. 1730 ई. में बूँदी की गद्दी पर किसे बैठाया गया?
- (A) भवानीसिंह
- (B) उम्मेदसिंह
- (C) दलेलसिंह
- (D) प्रतापसिंह
उत्तर: (C) दलेलसिंह
प्रश्न 3. दलेलसिंह और सवाई जयसिंह के बीच संबंध किस प्रकार बने?
- (A) सैन्य सहयोगी
- (B) रिश्तेदारी (विवाह)
- (C) शत्रुता
- (D) भाड़े का समझौता
उत्तर: (B) रिश्तेदारी (विवाह)
प्रश्न 4. मराठों ने पहली बार राजस्थान में किस संघर्ष के दौरान प्रवेश किया?
- (A) जोधपुर उत्तराधिकार संघर्ष
- (B) बूँदी उत्तराधिकार संघर्ष
- (C) अजमेर विद्रोह
- (D) मेवाड़ संघर्ष
उत्तर: (B) बूँदी उत्तराधिकार संघर्ष
प्रश्न 5. बूँदी पर मराठों के आक्रमण (1734 ई.) का नेतृत्व किसने किया?
- (A) बाजीराव प्रथम
- (B) होल्कर और सिन्धिया
- (C) जयसिंह
- (D) प्रतापसिंह
उत्तर: (B) होल्कर और सिन्धिया
प्रश्न 6. कच्छवाहा रानी ने कृतज्ञता प्रकट करने के लिए होल्कर को क्या किया?
- (A) स्वर्ण उपहार दिया
- (B) राखी बाँधी
- (C) मालवा परगने दिए
- (D) नकद धनराशि दी
उत्तर: (B) राखी बाँधी
लघु प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. बुद्धसिंह ने भवानीसिंह को क्यों अस्वीकार किया?
उत्तर: क्योंकि वह कच्छवाहा रानी से घृणा करता था और भवानीसिंह को अवैध संतान मानता था।
प्रश्न 2. जयसिंह ने बूँदी के लिए किसे शासक नियुक्त किया?
उत्तर: दलेलसिंह को (1730 ई.)।
प्रश्न 3. मराठों ने बूँदी पर कब आक्रमण किया?
उत्तर: 18 अप्रैल, 1734 ई.
प्रश्न 4. मराठों की सहायता लेने दक्षिण कौन गया?
उत्तर: प्रतापसिंह (सालिमसिंह का पुत्र)।
प्रश्न 5. मराठों का राजस्थान में आने का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: अधिक से अधिक धन प्राप्त करना।
FAQ (Frequently Asked Questions)
Q1. बूँदी उत्तराधिकार संघर्ष का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: बुद्धसिंह द्वारा भवानीसिंह को अपना वैध उत्तराधिकारी मानने से इनकार करना और सत्ता संघर्ष।
Q2. मराठों ने राजस्थान की राजनीति में कैसे हस्तक्षेप करना शुरू किया?
उत्तर: पहले भाड़े के सैनिक सहयोगी के रूप में, बाद में धन के लालच में दोनों पक्षों की मदद कर वे राजनीति में प्रभावशाली बन गए।
Q3. बूँदी पर मराठों का कब्जा कब हुआ?
उत्तर: 1734 ई. में मल्हारराव होल्कर और राणोजी सिन्धिया की सेना द्वारा।
Q4. जयसिंह ने बूँदी का नियंत्रण कैसे वापस लिया?
उत्तर: मराठों के हस्तक्षेप के बाद, जयसिंह ने पुनः बूँदी पर अधिकार कर दलेलसिंह को गद्दी पर बैठाया।
Q5. बूँदी संघर्ष का राजस्थान की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: इस संघर्ष ने मराठों को राजस्थान में प्रवेश दिलाया और धीरे-धीरे वे यहाँ के राजनीतिक समीकरणों में निर्णायक शक्ति बन गए।
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