Nobel Peace Prize 2025: वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को सम्मान
Nobel Peace Prize 2025:साल 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize 2025) वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो (María Corina Machado) को दिया गया है।
उन्हें यह पुरस्कार वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही शासन से शांतिपूर्ण परिवर्तन की दिशा में 20 वर्षों के सतत संघर्ष के लिए प्रदान किया गया।
नोबेल समिति ने कहा —
“लोकतंत्र ही स्थायी शांति की शर्त है। जब सत्ता डर और हिंसा से जनता को दबाती है, तब मचाडो जैसे साहसी लोगों को सम्मान देना आवश्यक है।”
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मारिया मचाडो कौन हैं?
Nobel Peace Prize 2025:मारिया मचाडो वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता, लोकतंत्र की समर्थक और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
उन्होंने “सुमाते (Súmate)” नामक संगठन की स्थापना की, जो चुनावों की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक सुधारों के लिए काम करता है।
मचाडो को उनके समर्थक “वेनेजुएला की आयरन लेडी” भी कहते हैं, क्योंकि उन्होंने तानाशाही राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ निडर होकर आवाज उठाई और लोगों को एकजुट किया।
संघर्ष की कहानी
- मचाडो पहली बार 2012 में तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने संसद में तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज का 9 घंटे लंबा भाषण बीच में रोकते हुए उन्हें “चोर” कहा।
- उन्होंने सार्वजनिक रूप से लोगों की संपत्ति जब्त करने के खिलाफ विरोध किया।
- इसके बाद मचाडो लोकतंत्र की प्रतीक बन गईं।
- 2024 में वे राष्ट्रपति पद की विपक्षी उम्मीदवार थीं, लेकिन मादुरो सरकार ने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी।
- उन्होंने फिर विपक्षी नेता एडमुंडो गोंजालेज उर्रुतिया का समर्थन किया, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला, लेकिन चुनाव परिणाम सरकार ने मानने से इनकार कर दिया।
नोबेल समिति का निर्णय
Nobel Peace Prize 2025:नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने कहा कि मचाडो ने नोबेल के तीनों प्रमुख मापदंडों को पूरा किया —
- लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा,
- तानाशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष,
- जनता में आशा और एकता का संदेश फैलाना।
उन्होंने यह भी कहा कि जब दुनिया में तानाशाही बढ़ रही है, तब मचाडो जैसी नेता लोकतंत्र की लौ जलाए हुए हैं।
मचाडो का बयान
मचाडो ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा —
“यह सम्मान वेनेजुएला के बहादुर लोगों का है, जो आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मैं यह पुरस्कार अपने देश और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को समर्पित करती हूं, जिन्होंने हमारे संघर्ष में समर्थन दिया।”
ट्रम्प को नोबेल नहीं मिलने पर विवाद
Nobel Peace Prize 2025:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी 2025 के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया था, लेकिन उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला।
उन्होंने गाजा सीजफायर प्लान, इजराइल-ईरान समझौता और कई संघर्षों को रोकने के प्रयास किए थे।
नोबेल कमेटी के अनुसार,
ट्रम्प का नामांकन 31 जनवरी 2025 की अंतिम तिथि के बाद प्राप्त हुआ,
इसलिए इस वर्ष वे पात्र नहीं थे।
Nobel Peace Prize 2025:ट्रम्प समर्थक और कुछ देशों ने इस पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया, जबकि कमेटी ने अपने नियमों का हवाला दिया।
अन्य प्रमुख नामांकन
2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए जिन प्रसिद्ध नामों पर चर्चा रही, उनमें शामिल थे —
| नाम | देश / कार्यक्षेत्र | कारण |
| डोनाल्ड ट्रम्प | अमेरिका | मध्यपूर्व में सीजफायर पहल |
| इलॉन मस्क | अमेरिका | अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा |
| इमरान खान | पाकिस्तान | मानवाधिकार और लोकतंत्र के लिए संघर्ष |
| ग्रेटा थनबर्ग | स्वीडन | जलवायु और पर्यावरणीय शांति |
| यूलिया नवलनया | रूस | मानवाधिकार और लोकतंत्र के लिए संघर्ष |
Nobel Peace Prize 2025
नोबेल शांति पुरस्कार प्रक्रिया
- नामांकन – हर साल 1 फरवरी से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलता है।
- जांच प्रक्रिया – फरवरी से सितंबर तक नोबेल समिति उम्मीदवारों के कार्यों का अध्ययन करती है।
- निर्णय – अक्टूबर में समिति गुप्त बैठक में विजेता चुनती है।
- घोषणा और समारोह – 10 अक्टूबर को घोषणा, और 10 दिसंबर को ओस्लो (नॉर्वे) में पुरस्कार वितरण।
पिछले 5 वर्षों के शांति नोबेल विजेता
| वर्ष | विजेता | देश / संगठन | कार्यक्षेत्र |
| 2024 | निहोन हिडांक्यो संगठन | जापान | परमाणु हथियारों के विरोध में अभियान |
| 2023 | नरगिस मोहम्मदी | ईरान | महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई |
| 2022 | अलेस बियालियात्स्की, मेमोरियल, सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज | बेलारूस, रूस, यूक्रेन | लोकतंत्र और मानवाधिकार |
| 2021 | मारिया रेसा, दिमित्री मुरातोव | फिलीपींस, रूस | प्रेस की स्वतंत्रता |
| 2020 | वर्ल्ड फूड प्रोग्राम | संयुक्त राष्ट्र | भूख और शांति के लिए कार्य |
Nobel Peace Prize 2025
परीक्षा उपयोगी तथ्य (Important for Exams)
- 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार – मारिया कोरीना मचाडो (वेनेजुएला)
- पुरस्कार का कारण – लोकतंत्र और शांतिपूर्ण परिवर्तन के लिए संघर्ष
- सम्मान समारोह स्थल – ओस्लो, नॉर्वे
- मचाडो द्वारा स्थापित संगठन – Súmate
- 2024 में मिला सम्मान – सखारोव पुरस्कार, वाच्लाव हावेल मानवाधिकार पुरस्कार
- पहली भारतीय महिला जिन्हें शांति नोबेल मिला – मदर टेरेसा (1979)
- भारत के पुरुष विजेता – कैलाश सत्यार्थी (2014, मलाला यूसुफजई के साथ)
मारिया मचाडो का यह सम्मान न केवल वेनेजुएला की जनता के संघर्ष की मान्यता है,
बल्कि यह पूरी दुनिया को यह संदेश देता है कि —
“लोकतंत्र और शांति की राह भले कठिन हो, लेकिन साहस और सत्य की आवाज कभी दबाई नहीं जा सकती।”
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