Nobel Prize in Literature 2025:हंगरी के लेखक लास्जलो क्रास्नाहोरकाई को मिला 2025 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार
‘सतांटैंगो’ जैसी गहराई भरी रचना के लेखक; किताब पर बनी 7 घंटे लंबी फिल्म, जीवन में कला और अराजकता का गहरा संगम
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लास्जलो क्रास्नाहोरकाई को मिला 2025 का नोबेल पुरस्कार इन लिटरेचर
Nobel Prize in Literature 2025:साल 2025 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Literature 2025) का ऐलान स्वीडिश एकेडमी ने गुरुवार को किया।
यह सम्मान हंगरी के प्रसिद्ध लेखक लास्जलो क्रास्नाहोरकाई (László Krasznahorkai) को उनकी गहरी, दार्शनिक और दूरदर्शी रचनाओं के लिए दिया गया है।
एकेडमी ने कहा— “क्रास्नाहोरकाई की रचनाएँ भय और अव्यवस्था के बीच भी कला की शक्ति को उजागर करती हैं।”
उन्हें इस पुरस्कार के तहत 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (लगभग ₹10.3 करोड़), एक गोल्ड मेडल और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। पुरस्कार वितरण समारोह 10 दिसंबर 2025 को स्टॉकहोम (स्वीडन) में होगा।
‘सतांटैंगो’ पर बनी 7 घंटे लंबी फिल्म
Nobel Prize in Literature 2025:लास्जलो की सबसे प्रसिद्ध किताब ‘सतांटैंगो (Satantango, 1985)’ हंगरी के एक गरीब गांव की कहानी है, जहाँ लोग लालच, धोखे और उम्मीदों में उलझे रहते हैं।
इस किताब पर 1994 में 7 घंटे लंबी फिल्म बनाई गई, जिसे अब तक की सबसे प्रतिष्ठित आर्टहाउस फिल्मों में गिना जाता है।
फिल्म की कहानी अराजकता, इंसानी कमजोरी और समाज के पतन को गहराई से दिखाती है।
उनकी एक और प्रसिद्ध किताब ‘The Melancholy of Resistance’ पर भी फिल्म बन चुकी है।
11 साल की उम्र में पता चला कि वे यहूदी हैं
Nobel Prize in Literature 2025:लास्जलो क्रास्नाहोरकाई का जन्म 5 जनवरी 1954 को ग्युला (Gyula), हंगरी में हुआ।
उनके पिता जॉर्जी क्रास्नाहोरकाई एक वकील थे।
दिलचस्प बात यह है कि लास्जलो को यह बात 11 साल की उम्र में पता चली कि वे यहूदी (Jewish) हैं।
उन्होंने दो शादियाँ कीं —
पहली अनिको पेलीहे (1990) से और दूसरी डोरा कोपचान्यी (1997) से, जो एक सिनोलॉजिस्ट और ग्राफिक डिजाइनर हैं।
फिलहाल लास्जलो हंगरी के सेंटलास्लो पहाड़ियों में एकांत जीवन बिता रहे हैं।
लास्जलो क्रास्नाहोरकाई के प्रमुख पुरस्कार
2015 – मैन बुकर इंटरनेशनल प्राइज
2019 – नेशनल बुक अवॉर्ड (अमेरिका)
2025 – साहित्य का नोबेल पुरस्कार
प्रमुख किताबें (Famous Works)
- Satantango (1985)
- The Melancholy of Resistance (1989)
- The Prisoner of Urga (1992)
- War and War (1999)
- Baron Wenckheim’s Homecoming (2016)
- Zsömle Odvan (2024)
लास्जलो का साहित्यिक दृष्टिकोण
Nobel Prize in Literature 2025:लास्जलो की लेखनी में दर्शन, अराजकता, समाज और इंसान की सीमाओं का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
उनकी भाषा कठिन जरूर है, लेकिन भाव बेहद गहरे और आत्ममंथन कराने वाले हैं।
वे दुनिया के उन लेखकों में गिने जाते हैं जिन्होंने आधुनिक समाज की निरर्थकता और मनुष्य की अस्तित्वगत पीड़ा को गहराई से उकेरा है।
नोबेल पुरस्कारों का इतिहास
नोबेल पुरस्कारों की स्थापना 1895 में अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल की वसीयत से हुई थी।
पहली बार 1901 में ये पुरस्कार दिए गए थे।
शुरुआत में यह पुरस्कार सिर्फ भौतिकी, रसायन, चिकित्सा, साहित्य और शांति के लिए दिए जाते थे।
बाद में अर्थशास्त्र को भी इसमें जोड़ा गया।
साहित्य के क्षेत्र में अब तक 122 बार (1901–2025) यह पुरस्कार दिया जा चुका है।
पिछले 5 वर्षों के साहित्य के नोबेल विजेता
| वर्ष | विजेता | देश | प्रमुख रचना |
| 2025 | लास्जलो क्रास्नाहोरकाई | हंगरी | सतांटैंगो |
| 2024 | हान कांग | दक्षिण कोरिया | द वेजिटेरियन |
| 2023 | जॉन फॉसे | नॉर्वे | सेप्टोलॉजी |
| 2022 | एनी एर्नो | फ्रांस | द इयर्स |
| 2021 | अब्दुलरजाक गुरनाह | तंजानिया/यूके | पैराडाइज |
Nobel Prize in Literature 2025
एशिया के पहले साहित्य नोबेल विजेता – रविंद्रनाथ टैगोर
1913 में रविंद्रनाथ टैगोर को उनकी महान कृति ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था।
वे एशिया के पहले लेखक थे जिन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ।
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