Nobel Prize in Medicine 2025:मेडिसिन का नोबेल 2025, तीन वैज्ञानिकों को मिला पुरस्कार, एक महिला भी शामिल
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इम्यून सिस्टम को बेहतर समझने और टी-कोशिकाओं की खोज के लिए सम्मान
Nobel Prize in Medicine 2025:साल 2025 का मेडिसिन का नोबेल प्राइज तीन वैज्ञानिकों – मैरी ई. ब्रंकॉ, फ्रेड राम्सडेल (अमेरिका) और शिमोन साकागुची (जापान) को दिया गया है।
इन्हें यह पुरस्कार पेरीफेरल इम्यून टॉलरेंस (Peripheral Immune Tolerance) की खोज के लिए मिला है, जिसने चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा दी है।
क्या है पेरीफेरल इम्यून टॉलरेंस ?
Nobel Prize in Medicine 2025:हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम रोज़ लाखों सूक्ष्मजीवों से लड़कर हमें सुरक्षित रखता है। लेकिन कई बार यही सिस्टम गलती से अपने ही अंगों को “दुश्मन” मानकर हमला कर देता है।
इसी समस्या को रोकने के लिए शरीर में एक खास प्रणाली होती है जिसे पेरीफेरल इम्यून टॉलरेंस कहा जाता है।
Nobel Prize in Medicine 2025:इसका काम है यह सुनिश्चित करना कि इम्यून सेल्स हमारे अपने ऊतकों (टिशू) पर हमला न करें।
अगर कोई टी-सेल (T-Cell) गलती से ऐसा करने लगे, तो यह प्रणाली उसे निष्क्रिय या खत्म कर देती है।
मैरी ई. ब्रंकॉ (Mary E. Brunkow)
- जन्म: 1961, अमेरिका
- संस्थान: इंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स बायोलॉजी, सिएटल
- उपलब्धि: रेगुलेटरी टी-सेल्स (Regulatory T-Cells) की खोज में अहम योगदान, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को अपने ही ऊतकों पर हमला करने से रोकती हैं।
- महत्व: उन्होंने Foxp3 जीन में म्यूटेशन की पहचान की, जो रेगुलेटरी टी-सेल्स के विकास में मुख्य भूमिका निभाता है।
फ्रेड राम्सडेल (Fred Ramsdell)
- जन्म: 4 दिसंबर 1960, इलिनॉय, अमेरिका
- संस्थान: सोनोमा बायोथेराप्यूटिक्स, सैन फ्रांसिस्को
- उपलब्धि: चूहों पर रिसर्च करते हुए पाया कि Foxp3 जीन में म्यूटेशन होने पर ऑटोइम्यून रोग (Autoimmune Disease) विकसित हो सकते हैं।
- योगदान: यह खोज इंसानों में गंभीर रोग IPEX (Immunodysregulation Polyendocrinopathy Enteropathy X-linked Syndrome) को समझने में सहायक रही।
शिमोन साकागुची (Shimon Sakaguchi)
- जन्म: 19 जनवरी 1951, शिगा, जापान
- संस्थान: ओसाका यूनिवर्सिटी, जापान
- उपलब्धि: 1995 में उन्होंने एक नई प्रकार की इम्यून सेल्स की खोज की, जिन्हें आज हम रेगुलेटरी टी-सेल्स (Regulatory T-Cells) के नाम से जानते हैं।
- महत्व: उन्होंने सिद्ध किया कि इम्यून सिस्टम केवल “थाइमस” (Central Tolerance) में नहीं बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों में भी नियंत्रित रहता है — यही है Peripheral Immune Tolerance।
इस खोज का महत्व
Nobel Prize in Medicine 2025:इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने की समझ से कैंसर, डायबिटीज़, और ऑटोइम्यून रोगों के इलाज में मदद मिल रही है।
इस पर आधारित नई इम्यूनोथेरेपी और ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन तकनीकें विकसित हो रही हैं।
यह खोज हमारे शरीर की “सेल्फ” और “नॉन-सेल्फ” पहचान की प्रक्रिया को गहराई से समझाती है।
पुरस्कार और सम्मान
- पुरस्कार तिथि: 10 दिसंबर 2025
- स्थान: स्टॉकहोम, स्वीडन
- सम्मान राशि: ₹10.3 करोड़ (लगभग 10 मिलियन स्वीडिश क्रोना), गोल्ड मेडल और प्रमाणपत्र
बीते 10 वर्षों के मेडिसिन नोबेल विजेता
| वर्ष | विजेता | शोध क्षेत्र |
| 2015 | विलियम कैंपबेल, सतोशी ओमुरा, तू यौयो | परजीवियों और मलेरिया के इलाज की खोज |
| 2016 | योशिनोरी ओहसुमी | ऑटोफैजी – शरीर की कचरा साफ प्रक्रिया |
| 2017 | जेफ्री हॉल, माइकल रोसबाश, माइकल यंग | 24 घंटे की जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) |
| 2018 | जेम्स एलिसन, तासुको होंजो | कैंसर के इलाज में नई इम्यून थेरेपी |
| 2019 | विलियम केलिन, पीटर रैटक्लिफ, ग्रेग सेमेंजा | कोशिकाओं की ऑक्सीजन पहचान |
| 2020 | हार्वे ऑल्टर, माइकल हॉफटन, चार्ल्स राइस | हेपेटाइटिस-C वायरस की खोज |
| 2021 | डेविड जूलियस, अर्डेम पटापाउटियन | दर्द और तापमान महसूस करने वाले रिसेप्टर्स |
| 2022 | स्वांते पाबो | मानव जीनोम और विकास की खोज |
| 2023 | कटालिन करिको, ड्रू वीस्मैन | COVID-19 के लिए mRNA वैक्सीन |
| 2024 | विक्टर एम्ब्रोस, गैरी रुवकुन | माइक्रो RNA और जीन नियंत्रण की खोज |
Nobel Prize in Medicine 2025
भारत और नोबेल मेडिसिन पुरस्कार
Nobel Prize in Medicine 2025:भारत मूल के डॉ. हरगोविंद खुराना को 1968 में मेडिसिन नोबेल मिला था।
उन्होंने यह समझाया कि DNA किस तरह प्रोटीन बनाता है – यह खोज आज कैंसर रिसर्च और जेनेटिक इंजीनियरिंग की नींव है।
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