Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar:राजस्थान के प्रमुख त्यौहार और हिन्दू पंचांग

Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar:राजस्थान के प्रमुख त्यौहार और हिन्दू पंचांग

Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar:प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राजस्थान की कला एवं संस्कृति के अंतर्गत ‘त्यौहार और हिन्दू कलैण्डर’ एक बेहद महत्वपूर्ण विषय है। अक्सर परीक्षाओं में हिन्दू माह, शक संवत्, विक्रम संवत् और त्यौहारों की तिथियों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम राजस्थान के प्रमुख त्यौहारों के आधारभूत पंचांग और कालगणना को विस्तार से समझेंगे।

Table of Contents

हिन्दू महीना और पखवाड़ा (Hindu Months):Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar:

हिन्दू महीने को मुख्य रूप से चंद्रमा की कलाओं के आधार पर दो पखवाड़ों (पक्षों) में बांटा जाता है:

कृष्ण पक्ष (बुदी)

महीने का प्रारम्भिक पखवाड़ा (चैत्र कृष्णा एकम् से चैत्र कृष्णा अमावस्या तक)।

शुक्ल पक्ष (सुदी)

महीने का अंतिम पखवाड़ा (चैत्र शुक्ला एकम् से पूर्णिमा तक)।

नोट: प्रथम पक्ष अमांत व द्वितीय पक्ष पूर्णिमांत कहलाता है।

भारत का राष्ट्रीय पंचांग (National Calendar of India):Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar

  • भारत का राष्ट्रीय पंचांग (National Calenda) शक संवत् (Shaka Era) पर आधारित है।
  • राष्ट्रीय पंचांग के रूप में ’22 मार्च, 1957′ को भारतीय संविधान ने शक संवत् को अपनाया था।
  • शक संवत् (Shaka Era) का पहला महीना ‘चैत्र’ और अंतिम महीना ‘फाल्गुन’ होता है।
  • शक संवत् कैलेण्डर का वर्ष सामान्यतः 365 दिनों का होता है। सामान्यतः चैत्र माह का पहला दिन 22 मार्च पड़ता है (अधिवर्ष या लीप ईयर होने पर यह 21 मार्च को पड़ता है)।
  • सरकारी उपयोग: (1) भारत का राजपत्र, (2) आकाशवाणी से समाचार प्रसारण, (3) भारत सरकार द्वारा जारी कैलेण्डर, (4) सार्वजनिक विज्ञप्तियां।

राष्ट्रीय पंचांग के 12 माह

  1. चैत्र 2. वैशाख 3. ज्येष्ठ 4. आषाढ़ 5. श्रावण 6. भाद्रपद 7. आश्विन 8. कार्तिक 9. मार्गशीर्ष 10. पौष 11. माघ 12. फाल्गुन

कलैण्डर के प्रमुख प्रकार (Types of Calendars):Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar

1. ग्रिगेरियन कलैण्डर (अंग्रेजी कलैण्डर)

यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य कलैण्डर है। इसका प्रारंभ 1 जनवरी से और समाप्ति 31 दिसम्बर को होती है।

2. शक संवत्
  • प्रारंभ: 78 ई. (78 A.D.) में कुषाण शासक कनिष्क के काल में।
  • शुरुआत और अंत: चैत्र प्रतिपदा से प्रारंभ और फाल्गुन 30 को समाप्ति।
  • अंतर: यह ग्रिगेरियन कलैण्डर वर्ष से 78 वर्ष पीछे रहता है।
3. नव संवत् (विक्रम संवत्)
  • प्रारंभ: 57 ई. पू. (57 B.C.) में।
  • शुरुआत और अंत: चैत्र शुक्ला एकम् से प्रारंभ एवं फाल्गुन अमावस्या को समाप्ति।
  • अंतर: यह ग्रिगोरियन कलैण्डर वर्ष से 57 वर्ष आगे रहता है।

परीक्षा उपयोगी तथ्य: प्रत्येक वर्ष मार्च माह में विक्रम संवत् एवं शक संवत् दोनों की शुरुआत होती है। ग्रिगेरियन कैलेण्डर और हिन्दू राष्ट्रीय पंचांग की तिथियों में प्रायः 15 दिनों का अन्तर रहता है।

अधिमास या पुरुषोत्तम मास क्या है?

Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar: भारतीय ज्योतिष शास्त्र चंद्रगणना पर आधारित है। एक वर्ष 354 दिन का होता है। जबकि पृथ्वी द्वारा सूर्य का परिभ्रमण 365 ¼ दिन में होता है।

इसके कारण प्रत्येक वर्ष में 11 दिन, 3 घड़ी, और 48 पल का अंतर आ जाता है।

प्राचीन भारतीय कालगणना (आधुनिक समय के संदर्भ में):Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar

भारतीय ज्योतिष में समय की सबसे छोटी और बड़ी इकाइयों को बहुत सूक्ष्मता से मापा गया है:

  • 1 दिन-रात (अहोरात्र) = 60 घड़ी
  • 1 घड़ी = 24 मिनट
  • 1 पल = 24 सेकंड (1 घड़ी में 60 पल होते हैं)
 11 दिन, 3 घड़ी और 48 पल का आधुनिक गणित

अगर हम सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच के इस अंतर को आज की घड़ियों के हिसाब से बदलें:

  • 11 दिन = 11 दिन
  • 3 घड़ी = 3 × 24 = 72 मिनट (1 घंटा 12 मिनट)
  • 48 पल = 48 × 24 = 1152 सेकंड (19 मिनट 12 सेकंड)

कुल वार्षिक अंतर: 11 दिन, 1 घंटा, 31 मिनट और 12 सेकंड।

अधिमास (मलमास) कैसे बनता है?

जब यह 11 दिन और कुछ घंटों का अंतर लगातार 3 वर्षों तक जुड़ता है, तो यह लगभग 32.5 से 33 दिन के बराबर हो जाता है। यह पूरा समय ठीक एक चंद्र मास (Lunar Month) के बराबर होता है। सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच इसी अंतर को पाटने (संतुलन बनाने) के लिए हर तीसरे वर्ष हिन्दू कैलेंडर में एक अधिमास (पुरुषोत्तम मास) जोड़ दिया जाता है।

यह अंतर तीन वर्ष में लगभग एक मास का हो जाता है। इस कालगणना में अंतर को पूर्ण करने के लिए प्रत्येक तीसरे वर्ष चंद्रमासों में एक मास की वृद्धि हो जाती है, जिसे अधिमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते है।

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देशी माह बनाम अंग्रेजी माह का तुलनात्मक चार्ट

देशी माहअंग्रेजी माहदेशी माहअंग्रेजी माह
पौष – माघजनवरीमाघ – फाल्गुनफरवरी
फाल्गुन – चैत्रमार्चचैत्र – वैशाखअप्रैल
वैशाख – ज्येष्ठमईज्येष्ठ – आषाढ़जून
आषाढ़ – श्रावणजुलाईश्रावण – भाद्रपदअगस्त
भाद्रपद – आश्विनसितम्बरआश्विन – कार्तिकअक्टूबर
कार्तिक – मार्गशीर्षनवम्बरमार्गशीर्ष – पौषदिसम्बर

महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीक और उनके अपनाए जाने की तिथियां :Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar:

  • राष्ट्रीय ध्वज: 22 जुलाई, 1947
  • राष्ट्रगान: 24 जनवरी, 1950
  • राज-चिह्न: 26 जनवरी, 1950
  • राष्ट्रीय पंचांग: 22 मार्च, 1957

भारतीय पर्वों का वर्गीकरण (Classification of Indian Festivals):Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar

उद्देश्य के आधार पर भारतीय (और राजस्थानी) त्यौहारों को निम्न प्रकार विभाजित किया जा सकता है:

कृषि पर्व

(1)नागपंचमी, (2) दीपावली, (3) मकर संक्रांति,(4) बसंत पंचमी, (5) होली, (6)गंगा दशहरा,  (7) पोंगल, (8) ओणम, (9) हरियाली तीज आदि।

कामना पर्व (इच्छापूर्ति हेतु)

(1) गुरू पूर्णिमा, (2) ऋषि पंचमी, (3) शिवरात्री, (4) अनंत चर्तुदशी, (5) भईया दूज, (6) गणगौर, (7) गोर्वधन पूजा, (8) वट सावित्री, (9) गणेश चतुर्थी, (10) करवा चौथ, (11) पितृ पक्ष, (12) नवरात्र इत्यादि।

जयंती पर्व

रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी, अक्षय तृतीया, गुरू नानक जयंती, विवेकानंद जयंती, बुद्ध पूर्णिमा, महावीर जयंती, बाल दिवस।

श्रद्धाजंलि पर्व

 पितृ पक्ष, बारावफात, ईस्टर, चेटीचण्ड।

राष्ट्रीय पर्व

गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती।

ऋतु पर्व

 दीपावली, मकर संक्राति, होली, बंसत पंचमी, ओणम, पोंगल, बीहू।

छात्रों के लिए विशेष टिप:Major Festivals of Rajasthan and Hindu Calendar

इस जानकारी को अपने नोट्स में शामिल करें, विशेषकर शक संवत् और विक्रम संवत् के बीच के अंतर (78 ई. और 57 ई. पू.) से जुड़े प्रश्न अक्सर सीधे परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।)

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