MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY:मुस्लिम समाज के प्रमुख त्यौहार और उर्स

MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY:मुस्लिम समाज के प्रमुख त्यौहार और उर्स

MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY:मुस्लिम समाज के प्रमुख त्यौहार और उर्स प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुस्लिम समाज के त्यौहार, हिजरी कलैंडर के 12 महीने और राजस्थान के प्रमुख उर्स (अजमेर, नागौर, डूंगरपुर, झुंझुनूं) की विस्तृत जानकारी।

प्रतियोगी परीक्षाओं  में ‘कला एवं संस्कृति’ (Art and Culture) के अंतर्गत मुस्लिम समाज के प्रमुख त्यौहारों और मेलों (उर्स) से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे दी गई जानकारी को परीक्षा की दृष्टि से बेहद सरल और सटीक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

हिजरी सन् (इस्लामी कैलेंडर) का परिचय:MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY

MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY:हिजरी सन् पूर्णतः चन्द्रमा पर आधारित होता है। इस कैलेंडर की कुल अवधि 360 दिन या उससे कम होती है। हिजरी सन् का पहला महीना मुहर्रम तथा अंतिम महीना जिलहिज होता है।

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प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर हिजरी महीनों के क्रम पूछे जाते हैं। नीचे 12 महीनों की सूची उनके अंग्रेजी महीनों (लगभग) के साथ दी गई है:

क्रमहिजरी माह का नामअंग्रेजी माह (लगभग)
1मुहर्रम उल हरामनवम्बर
2सफर उल मुजफ्फर (सफी उल सफर)दिसम्बर
3रबी उल अव्वलजनवरी
4रबी उल सानिफरवरी
5जमादि उल अव्वलमार्च
6जमादि उल सानिअप्रैल
7रज्जब उल मुराज़बमई
8शाबान उल मुअज्जम (सावान)जून
9रमजान उल मुबारकजुलाई
10शव्वाल उल मुकर्रमअगस्त
11जिल्कादसितम्बर
12जिलहिजअक्टूबर

मुस्लिम समाज के प्रमुख त्यौहार:MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY

मोहर्रम (अशुरा):MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY
  • तिथी: मुहर्रम माह की 10वीं तारीख
  • विशेष: यह इस्लामी वर्ष का पहला महीना है जिसे इस्लाम के चार पवित्र माह और ‘अल्लाह का महीना’ कहा जाता है।
  • इतिहास: इस माह में हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 अनुयायियों ने सत्य और इंसाफ के लिए यजीद की फौज से लड़ते हुए कर्बला के मैदान में शहादत पाई थी। मोहर्रम की 10 तारीख को ‘अशुरा’ कहा जाता है। इस दिन ताजिए निकाले जाते हैं जिन्हें कर्बला के मैदान में दफनाया जाता है।
इद-उल-मिलादुलनबी (बारावफात):MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY
  • तिथी: रबी उल-अव्वल माह की 12वीं तारीख
  • विशेष: यह त्यौहार पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब (जन्म: 570 ई., मक्का) के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है।
  • बारावफात क्यों? सुन्नी मुसलमानों के अनुसार यही दिन पैगम्बर मुहम्मद साहब के दुनिया से रुखसत (निधन) होने का दिन भी है। रुखसत होने से पहले पैगम्बर साहब 12 दिनों तक अस्वस्थ रहे, इसलिए इसे ‘बारावफात’ कहते हैं।
इद-उल-फितर (मीठी ईद / सिवैयों की ईद):MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY
  • तिथी: शव्वाल (सव्वाल) माह की पहली तारीख
  • विशेष: मुस्लिम लोग रमजान के पवित्र माह में 30 दिन तक रोजे रखने के बाद अल्लाह के शुक्राने के तौर पर इसे मनाते हैं। ईदगाह में सामूहिक नमाज के बाद लोग गले मिलकर मुबारकबाद देते हैं। यह आपसी भाईचारे का त्यौहार है।
इदुलजुहा (बकरीद):MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY
  • तिथी: जिलहिज माह की 10वीं तारीख
  • विशेष: यह कुर्बानी का त्यौहार है। इसे पैगम्बर हजरत इब्राहीम द्वारा अपने पुत्र हजरत इस्माइल की अल्लाह की राह में कुर्बानी देने की स्मृति में मनाया जाता है। इसी माह में मुसलमान ‘हज’ यात्रा करते हैं।
शबे बारात
  • तिथी: शाबान (सावान) माह की 14वीं तारीख की शाम
  • विशेष: मान्यता है कि इस दिन हजरत मुहम्मद साहब की आकाश में अल्लाह से मुलाकात हुई थी। यह रात पिछले साल के कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली मानी जाती है। इसमें नमाज, कुरान की तिलावत और खैरात करना अहम है।
शबे कद्र
  • तिथी: रमजान माह की 27वीं तारीख
  • विशेष: इस्लाम के मुताबिक, इस पवित्र रात (शब) में इबादत करने वालों के पिछले गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। इसी दिन पवित्र ‘कुरान’ उतारा गया था।
चेहल्लुम
  • तिथी: सफर मास की 20वीं तारीख
  • विशेष: हजरत इमाम हुसैन की शहादत (मोहर्रम) के ठीक 40 दिन बाद, उनकी याद में चेहल्लुम मनाया जाता है।
हजरत ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती का जन्मदिवस
  • तिथी: हिजरी सन् के जमादि उलसानि माह की 8 तारीख।

राजस्थान के प्रमुख उर्स एवं दरगाह मेले (Fairs of Rajasthan):MAJOR FESTIVALS AND URS OF MUSLIM SOCIETY

प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थान के मेलों और उर्स से सीधे सवाल पूछे जाते हैं:

उर्स गरीब नवाज (अजमेर)
  • स्थान: अजमेर शरीफ दरगाह
  • अवधि: रज्जब माह की 1 से 6 (या 9) तारीख तक। ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की बरसी के रूप में।
  • प्रमुख तथ्य: उर्स की अनौपचारिक शुरूआत दरगाह के ऐतिहासिक बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाने से होती है। विधिवत शुरूआत जन्नती दरवाजा खुलने से होती है (चाँद दिखने पर 29 जमादी उलसानि को खुलता है व 6 रज्जब को बंद होता है)। यह सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का अनूठा संगम है।
तारकीन का उर्स (नागौर)
  • स्थान: नागौर
  • विशेष: यह सूफियों की चिश्ती शाखा के संत काजी हमीदुद्दीन नागौरी की दरगाह है। अजमेर के बाद यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा उर्स माना जाता है।
गलियाकोट का उर्स (डूंगरपुर)
  • स्थान: माही नदी के किनारे, गलियाकोट (डूंगरपुर)
  • विशेष: यह दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ स्थान है। यहाँ फखरुद्दीन पीर की मजार है, जहाँ प्रतिवर्ष विशाल उर्स आयोजित किया जाता है।
नरहड़ की दरगाह का मेला (झुंझुनूं)
  • स्थान: नरहड़ गाँव (झुंझुनूं)
  • विशेष: इसे ‘शक्कर पीर बाबा की दरगाह’ (हजरत हाजिब शक्कर बादशाह) के नाम से जाना जाता है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य: यहाँ कृष्ण जन्माष्टमी के दिन विशाल मेला लगता है जो साम्प्रदायिक सौहार्द का बेहतरीन उदाहरण है। श्रद्धालु यहाँ स्थित जाल के वृक्ष पर मन्नत के डोरे बाँधते हैं।

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