Music Institutes and Academies of Rajasthan:राजस्थान की प्रमुख संगीत संस्थान व अकादमियां
Music Institutes and Academies of Rajasthan: राजस्थान की कला, संस्कृति और साहित्य से हर परीक्षा में कई प्रश्न पूछे जाते हैं। इस लेख में राज्य के प्रमुख कला संस्थानों, अकादमियों, उनके स्थापना वर्ष और कार्यक्षेत्र का विस्तृत और सटीक विवरण दिया गया है।
भारत एवं राजस्थान में प्रसारण सेवाएं:Music Institutes and Academies of Rajasthan
आकाशवाणी (All India Radio)
- भारत में शुरुआत: 23 जुलाई 1927 ई. (इण्डियन ब्रॉड कास्टिंग कम्पनी द्वारा)।
- आकाशवाणी नामकरण: 8 जून 1936 ई. से यह अस्तित्व में आया।
- राजस्थान में प्रथम प्रसारण: 1940 ई. में जोधपुर रियासत में (प्रथम निदेशक: अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सरोद वादक अली अकबर खां, बाद में यह केंद्र बंद हो गया)।
- राजस्थान का प्रथम आकाशवाणी केंद्र: जयपुर। इसका उद्घाटन 9 अप्रैल 1955 को भारत के तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री डा. बालकृष्ण विष्णु केसकर द्वारा किया गया।
- वर्तमान स्थिति: राजस्थान में कुल 17 प्रसारण केन्द्र हैं (जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, सूरतगढ़, कोटा, चित्तौड़गढ़, अलवर, नागौर, बांसवाड़ा, बाड़मेर, सवाई माधोपुर, चूरू, जैसलमेर, अजमेर, झालावाड़, माउंट आबू)। प्रदेश की 98.5% जनता तक इसकी पहुँच है।
दूरदर्शन (Doordarshan):Music Institutes and Academies of Rajasthan
भारत में शुरुआत दूरदर्शन
15 सितम्बर 1959 ई. (दिल्ली से)।
राजस्थान में प्रथम दूरदर्शन केंद्र
1 मार्च 1977 ई. (स्थानीय कार्यक्रमों का प्रसारण 30 जुलाई 1987 ई. से)।
राजस्थान में दूरदर्शन केंद्र वर्तमान स्थिति
प्रदेश में 52 दूरदर्शन प्रसारण केंद्र हैं। जयपुर तथा उदयपुर में कार्यक्रम उत्पादन स्टूडियो हैं।
प्रादेशिक समाचार
जयपुर केंद्र से 11 फरवरी 1990 ई. से आरंभ।
डी.डी. 2
जयपुर तथा कोटा से कार्यक्रम प्रसारित होते हैं।
यह भी पढ़ें :-
राजस्थान कला एवं संस्कृति विभाग:Music Institutes and Academies of Rajasthan
राजस्थान में कला एवं संस्कृति के संरक्षण एवं उन्नयन हेतु इस विभाग का अलग से गठन किया गया है। इसके अधीन पूरे राज्य में 9 प्रमुख संस्थाएं संचालित हैं:
- पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग, जयपुर
- राजस्थान अभिलेखागार, बीकानेर
- राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर
- मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान(Arabic-Persian Research Institute), टोंक
- राजस्थान राज्य संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर
- राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
- जयपुर कत्थक केंद्र, जयपुर
- रवींद्र मंच सोसायटी, जयपुर
- जवाहर कला केंद्र, जयपुर
राज्य के प्रमुख कला एवं सांस्कृतिक संस्थान:Music Institutes and Academies of Rajasthan
राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर
- स्थापना: 06 सितम्बर 1957
- मुख्य उद्देश्य एवं कार्य:
- भारतीय नृत्य, नाटक एवं संगीत का परिपोषण एवं उन्नयन।
- संस्थाओं के बीच समन्वय और नई संस्थाओं की स्थापना में सहायता।
- रंगमंच की स्थापना, साज-सज्जा और अभिनय कला के प्रशिक्षण को प्रोत्साहन।
- नये नाटकों के सृजन को पुरस्कार देना।
अन्य महत्वपूर्ण संस्थान:Music Institutes and Academies of Rajasthan
राजस्थान संगीत संस्थान, जयपुर
स्थापना 1950 ई.। प्रथम निदेशक श्री ब्रह्मानंद गोस्वामी। 1980 ई. में इसे कॉलेज शिक्षा निदेशालय को सौंप दिया गया।
राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
स्थापना 1957 ई. (रवीन्द्र मंच में)। उद्देश्य: कला प्रदर्शनियों का आयोजन, कलाकारों को सम्मान/फैलोशिप और आधुनिक कला संग्रहालय का संचालन।
जयपुर कत्थक केन्द्र, जयपुर
स्थापना 1978 ई.। उद्देश्य: कत्थक के जयपुर घराने की शास्त्रीय शैली को पुनर्जीवित करना व पारंपरिक प्रशिक्षण देना।
रवीन्द्र मंच, जयपुर
स्थापना 15 अगस्त 1963 ई.। यहाँ मुख्य सभागार, ओपन एयर थियेटर और पूर्वाभ्यास कक्ष मौजूद हैं।
जवाहर कला केन्द्र, जयपुर
स्थापना 1993 ई.। इसके वास्तुविद् ‘चार्ल्स कोरिया’ थे। इसमें 9 सभागार खण्ड, मुक्ताकाशी मंच, शिल्पग्राम और चार प्रमुख विभाग हैं।
भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर
स्थापना 1952 ई. में ‘पद्मश्री’ देवीलाल सामर द्वारा। यह कठपुतली कला और लोक संस्कृति का विश्वविख्यात संग्रहालय है।
रूपायन संस्थान, बोरून्दा (जोधपुर)
स्थापना 1960 ई.। कार्य: राजस्थानी लोकगीतों और कथाओं का संकलन।
पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर
स्थापना 1986 ई. (भारत सरकार द्वारा)। इसका उद्देश्य लुप्त हो रही लोक कलाओं का पुनरुत्थान है। (भारत में ऐसे कुल 7 केंद्र हैं)।
यह भी पढ़ें :-
जिलेवार प्रमुख प्रेक्षागृह (Auditorium) एवं रंग संस्थाएं:Music Institutes and Academies of Rajasthan
| जिला | प्रेक्षागृह (Auditorium) | प्रमुख रंग संस्थाएं (Theaters/Groups) |
| जयपुर | रवींद्र मंच, जवाहर कला केंद्र, महाराष्ट्र मंडल, बी.एम. बिड़ला सभागार | श्रुतिमंडल, वीणापाणि कला मंदिर, एकजुट, सुर सरगम, जयपुर इप्टा, कलाश्री |
| अजमेर | सूचना केंद्र रंगमंच, राजकीय/सावित्री महाविद्यालय सभागार | आधुनिक नाट्य कला परिषद्, कला संगम, मगरा लोककला मंडल (जवाजा) |
| उदयपुर | भारतीय लोक कला मंडल, टाउन हॉल, सूचना केंद्र | संगीत नाट्य निकेतन, मीरा कला मन्दिर, महाराणा कुंभा संगीत समिति |
| बीकानेर | टाउनहॉल | संकल्प, कला संगम सेवा संस्थान, मरूधरा थियेटर सोसायटी, रंगायन |
| कोटा | श्री राम रंगमंच, श्रीराम कला मंदिर | सप्त श्रृंगार, रंगायतन, प्रज्ञा लोक संगीत नाट्य मंडल |
| अलवर | हैप्पी स्कूल सभागार | स्वरांजलि, कला भारती, पलाश |
| भीलवाड़ा | टाउन हॉल | रसधारा, सुर श्रृंगार, अंकुर |

Music Institutes and Academies of Rajasthan
(अन्य जिलों की प्रमुख संस्थाएं: बाड़मेर में मंथन आर्ट व मरूधरा लोक कला, पाली में मरुधरा लोक कला मंडल, सवाईमाधोपुर में शिक्षा प्रचार मंडल आदि कार्यरत हैं।)
राजस्थान की प्रमुख भाषा एवं साहित्य अकादमियां:Music Institutes and Academies of Rajasthan
परीक्षा की दृष्टि से इन अकादमियों की स्थापना, स्थान, पत्रिकाएं और उनके द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी
बीकानेर (जनवरी 1983)। पत्रिका: ‘जागती जोत’। पुरस्कार: सूर्यमल्ल मिश्रण, मुरलीधर व्यास कथा सम्मान, शिवचरण भरतिया पुरस्कार।
राजस्थान साहित्य अकादमी
उदयपुर (28 जनवरी 1958)। पत्रिका: ‘मधुमति’। सर्वोच्च पुरस्कार: ‘मीरा पुरस्कार’ (प्रथम पुरस्कार 1959-60 में डॉ. रामानन्द तिवारी को)।
राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी
जयपुर (1968 ई.)। कार्य: विश्वविद्यालय स्तरीय प्रामाणिक पुस्तकों का प्रकाशन।
राजस्थान उर्दू अकादमी
जयपुर (12 फरवरी 1979)। त्रैमासिक पत्रिका: ‘नखलिस्तान’।
राजस्थान सिंधी अकादमी
जयपुर (1979)। द्विमासिक पत्रिका: ‘सिन्धु दूत’।
राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी
भरतपुर (19 जनवरी 1986)। त्रैमासिक पत्रिका: ‘ब्रजशत दल’।
अरबी फारसी शोध संस्थान
टोंक (1978)। कार्य: ऐतिहासिक व सांस्कृतिक अनुसंधान।
संस्कृत अकादमी
जयपुर (1982)। पत्रिका: ‘स्वरमंगला’। पुरस्कार: माघ पुरस्कार, आचार्य नवल किशोर कांकर पुरस्कार, अम्बिकादत्त व्यास पुरस्कार, मधुसूदन ओझा पुरस्कार।
यह भी पढ़ें :- मुस्लिम समाज के प्रमुख त्यौहार और उर्स