Revolutionaries of Rajasthan: राजस्थान के क्रांतिकारी
Revolutionaries of Rajasthan: भारत के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक 1857 ई. का स्वतंत्रता संग्राम था। राजस्थान भी इस महान क्रांति से अछूता नहीं रहा। यहाँ अनेक वीर क्रांतिकारियों, सामंतों, कवियों और साहित्यकारों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। इन वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर स्वतंत्रता की लौ को प्रज्ज्वलित रखा।
इस लेख में हम राजस्थान के प्रमुख क्रांतिकारियों, साहित्यकारों और क्रांति स्थलों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
Table of Contents
प्रमुख क्रांतिकारी:Revolutionaries of Rajasthan
डूंगजी-जवारजी (सीकर):Revolutionaries of Rajasthan
1857 ई. के स्वतंत्रता संग्राम में सीकर क्षेत्र के काका-भतीजा डूंगजी-जवारजी प्रसिद्ध देशभक्त हुए।
डूंगजी शेखावाटी ब्रिगेड में रिसालेदार थे। बाद में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और देश की आजादी के लिए धन एकत्रित करने लगे। धनी लोगों से सहयोग न मिलने पर वे उनके यहाँ डाका डालते थे और उस धन से निर्धनों की सहायता भी करते थे।
इन दोनों वीरों ने अपने साथियों के साथ कई बार अंग्रेज छावनियों को लूटा।
डूंगजी के साले भैरूसिंह ने उन्हें भोजन के बहाने बुलाकर अत्यधिक शराब पिलाई और पकड़वा दिया। अंग्रेजों ने उन्हें आगरा दुर्ग में बंद कर दिया।
जवारजी ने अपनी वीरता से डूंगजी को छुड़वाने की प्रतिज्ञा की। कहा जाता है कि लोटिया जाट और करणा मीणा ने अपनी बुद्धिमत्ता और वीरता से डूंगजी को छुड़ाया।
इनकी वीरता पर लोकगीत प्रसिद्ध है—
भला-भला-रा-टूक-उड़ावे-लड़े-डूंगजी-न्हार।
लोटिया-जाट,-करणियो-मीणो,-वंध-वध-बावे-तरवार।।
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अभयसिंह-चिमनसिंह:Revolutionaries of Rajasthan
खोंखरी के अभयसिंह और चिमनसिंह दो वीर भाई थे जिन्होंने अंग्रेजों को बहुत परेशान किया।
उन्होंने कई बार अंग्रेजी डाक और खजाने को लूटा तथा अंग्रेजी पलटनों का सामना किया।
अरावली पर्वतमाला में भाखर-ढांणा उनका मुख्य स्थान था।
अंग्रेजी सेना ने उन्हें घेर लिया, लेकिन उन्होंने अनेक सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया और अंततः अपने साथियों सहित वीरगति को प्राप्त हुए।
मेहराब खान (कोटा):Revolutionaries of Rajasthan
कोटा राज्य की पलटन के रिसालदार मेहराब खान 1857 की क्रांति के प्रमुख नेताओं में थे।
उन्होंने जयदयाल भटनागर के साथ मिलकर अंग्रेज विरोधी भावनाएँ फैलाने के लिए परिपत्र जारी किया।
उनके समर्थन से विद्रोहियों ने मेजर बर्टन और उसके पुत्रों की हत्या की।
बाद में उन्हें गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया और 1860 ई. में मेहराब खान को कोटा में फाँसी दे दी गई।
रावत केसरीसिंह (सलूम्बर):Revolutionaries of Rajasthan
मेवाड़ के सलूम्बर ठिकाने के रावत केसरीसिंह ने 1857 की क्रांति में विद्रोहियों को शस्त्र, रसद और सैनिक सहायता प्रदान की।
उन्होंने कई क्रांतिकारियों को शरण भी दी।
दूसरा भामाशाह – अमरचंद बांठिया:Revolutionaries of Rajasthan
अमरचंद बांठिया ने अपनी पूरी धन-संपत्ति तात्या टोपे को स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित कर दी। राजस्थान के अमरचंद बांठिया को दूसरा भामाशाह कहा जाता है। यह बलिदान ही उनकी फाँसी का कारण बना।
मीर आलम खाँ (टोंक):Revolutionaries of Rajasthan
मीर आलम खाँ ने विद्रोही सैनिकों का नेतृत्व किया। और मीर आलम खाँ ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों का खुला विरोध किया
टोंक के नवाब ने उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए।
युद्ध करते हुए मीर आलम खाँ वीरगति को प्राप्त हुए।
रावत जोधसिंह (कोठारिया):Revolutionaries of Rajasthan
कोठारिया के रावत जोधसिंह ने आउवा के ठाकुर कुशालसिंह और तात्या टोपे को सहायता दी।
उन्होंने कई क्रांतिकारियों को शरण दी।
लाला जयदयाल भटनागर (कोटा):Revolutionaries of Rajasthan
कोटा में 1857 की क्रांति के मुख्य संगठनकर्ता लाला जयदयाल भटनागर थे।
उन्होंने सैनिकों और जनता को अंग्रेजों के विरुद्ध प्रेरित किया।
हरदयाल भटनागर:Revolutionaries of Rajasthan
हरदयाल भटनागर ने भी 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मार्च 1858 में जनरल रॉबर्ट्स की सेना से युद्ध करते हुए वे शहीद हुए।
1857 की क्रांति में राजस्थानी साहित्यकारों का योगदान:Revolutionaries of Rajasthan
राजस्थान के कवियों और साहित्यकारों ने अपने गीतों और वीर रस की रचनाओं से जनजागरण किया।
इनकी लेखनी ने जनता और शासकों में अंग्रेज विरोधी चेतना उत्पन्न की।
कवि बांकीदास:Revolutionaries of Rajasthan
कवि बांकीदास ने अंग्रेजों का साथ देने वाले राजाओं की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने लिखा—
आयो इंगरेज मुलक रै ऊपर
आहंस लीधा खैचिडरा।
उन्होंने जनता को अंग्रेजों के विरुद्ध शस्त्र उठाने के लिए प्रेरित किया।
महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण:Revolutionaries of Rajasthan
राजस्थान के महान कवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने 1857 की क्रांति में जनजागरण का बिगुल फूँका।
उनकी प्रमुख रचनाएँ—
- वीर सतसई
- वंश भास्कर
- सतीरासो
- रामरंजाट
- बलवंत विलास
उनके दोहे वीरता और स्वाधीनता की भावना से ओत-प्रोत हैं।
देश पड्यों परत्रस हुओ,
पूत फिर आजाद।।
कवि शंकरदान दामौर:Revolutionaries of Rajasthan
शंकरदान दामौर ने 1857 की क्रांति को स्वतंत्रता प्राप्ति का स्वर्ण अवसर बताया।
आजाद हिन्द करवा अवर,
औसर इस्यो न आवसी।।
क्रांति के प्रमुख स्थल:Revolutionaries of Rajasthan
राजस्थान में 1857 की क्रांति के प्रमुख स्थल थे—
- नसीराबाद
- नीमच
- आउवा
- कोटा
- विथौड़ा
- चेलावास
- धौलपुर
सुगाली देवी मंदिर (आउवा):Revolutionaries of Rajasthan
आउवा स्थित 9वीं सदी का सुगाली देवी मंदिर क्रांति का प्रमुख केंद्र था।
यह विद्रोह के नियंत्रण और संचालन का मुख्य स्थान रहा।
कामेश्वर महादेव मंदिर:Revolutionaries of Rajasthan
आउवा का कामेश्वर महादेव मंदिर भी क्रांतिकारियों की योजना और संचालन का विशिष्ट केंद्र था।
बाद में अंग्रेजों ने इसे नष्ट कर दिया।
1857 की क्रांति में राजस्थान के वीर क्रांतिकारियों, साहित्यकारों और सामंतों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इन वीरों ने अपने साहस, बलिदान और राष्ट्रप्रेम से स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
आज भी इनका योगदान राजस्थान और भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
प्रश्न: 1857 की क्रांति में राजस्थान के प्रमुख क्रांतिकारी कौन थे?
उत्तर: डूंगजी-जवारजी, मेहराब खान, जयदयाल भटनागर, अमरचंद बांठिया, मीर आलम खाँ और रावत केसरीसिंह प्रमुख क्रांतिकारी थे।
प्रश्न: राजस्थान में 1857 की क्रांति का प्रमुख केंद्र कौन सा था?
उत्तर: आउवा, नसीराबाद, नीमच और कोटा प्रमुख केंद्र थे।
प्रश्न: सूर्यमल्ल मिश्रण का क्या योगदान था?
उत्तर: उन्होंने वीर रस की कविताओं और ‘वीर सतसई’ के माध्यम से जनजागरण किया।
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